आईने के सामने बैठाया उन्हें ,
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ।
लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।
गैरों की इनायत किससे कहें ,
जो अपना था ,वो, अन्जाना हो गया ।
सारी रात, कटी मेरी, आंखों में ,
यूं कयामत उनका सपना आना हो गया ।
यूँ तो शरमो हया के परदे थे ,
पलकॊं से , उनका,झपकाना खो गया ।
अरमाँ मचले,और फ़िर दिल में रहे ,
बेईमान था मौसम , सुहाना हो गया ।
हम किस की शिकायत किससे करें ,
दिल अपना था वो बेगाना हो गया ॥
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ,
मेरा आईना उनका दीवाना ...........
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मंगलवार, 18 नवंबर 2008
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