मिलना जुलना भूल गए हैं ,क्या मिलना क्या मिलाना ,
दिल दिमाग में बसे हुए हैं , क्या आना क्या जाना ...
बिछड़ा था जब अपना था , मिला था --था बेगाना,
बात- बात में करा था उसने , मुझको भी दीवाना ...
भूली --बिसरी यादें उसकी ,सीखा था बिसराना,
याद आ गयी,शुरू किया जब फ़िर ख्वाबों में आना ...
सिसक-सिसक कर सोते हैं वो,गुपचुप गुपचुप रोते हैं वो ,
अजब-अजब से होते हैं वो, समझो दिल का आना ...
हर नस में इक अलग नशा है ,वो आए मैखाना ,
आए हैं , और रचे बसे हैं , किसे यहाँ से जाना ...
शमा जली थी हौले - हौले ,जलता है परवाना ,
शमा जली थी , हौले - हौले जलता है परवाना ,
तेरा ही तो नशा चढ़ा है , नशे से क्या घबराना ...
बलिदानों की मंद पिपासा , लै कर में शिर आना ,
कम्पित अधरों की अभिलाषा में चहुँदिश घिर जाना ,
स्वप्न सुरा के मदिरालय में ,मचल मचल गिर जाना ,
याद रहेगा तेरा मुझको , वादों से फ़िर जाना ...
झलक झलक कर दिल से खोने ,विद्रोही हैं स्वप्न सलोने ,
लगते हैं आंखों को धोने , उन सपनों में आना ...
मधुर मधुर अनुपम यादों में यूं, आंखों का भर आना ,
इन आंखों में सपने डूबे ,तुम भी दिलबर आना.....
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सोमवार, 3 नवंबर 2008
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