सोमवार, 3 नवंबर 2008

तुम भी दिलबर आना

मिलना जुलना भूल गए हैं ,क्या मिलना क्या मिलाना ,
दिल दिमाग में बसे हुए हैं , क्या आना क्या जाना ...
बिछड़ा था जब अपना था , मिला था --था बेगाना,
बात- बात में करा था उसने , मुझको भी दीवाना ...
भूली --बिसरी यादें उसकी ,सीखा था बिसराना,
याद आ गयी,शुरू किया जब फ़िर ख्वाबों में आना ...
सिसक-सिसक कर सोते हैं वो,गुपचुप गुपचुप रोते हैं वो ,
अजब-अजब से होते हैं वो, समझो दिल का आना ...
हर नस में इक अलग नशा है ,वो आए मैखाना ,
आए हैं , और रचे बसे हैं , किसे यहाँ से जाना ...
शमा जली थी हौले - हौले ,जलता है परवाना ,
शमा जली थी , हौले - हौले जलता है परवाना ,
तेरा ही तो नशा चढ़ा है , नशे से क्या घबराना ...
बलिदानों की मंद पिपासा , लै कर में शिर आना ,
कम्पित अधरों की अभिलाषा में चहुँदिश घिर जाना ,
स्वप्न सुरा के मदिरालय में ,मचल मचल गिर जाना ,
याद रहेगा तेरा मुझको , वादों से फ़िर जाना ...
झलक झलक कर दिल से खोने ,विद्रोही हैं स्वप्न सलोने ,
लगते हैं आंखों को धोने , उन सपनों में आना ...
मधुर मधुर अनुपम यादों में यूं, आंखों का भर आना ,
इन आंखों में सपने डूबे ,तुम भी दिलबर आना.....

28 टिप्‍पणियां:

sunil manthan sharma ने कहा…

बिछड़ा था जब अपना था , मिला था --था बेगाना,
बहुत अच्छा.

sandhyagupta ने कहा…

Bhavnaaon ki khubsurat abhivyakti.

guptasandhya.blogspot.com

seema gupta ने कहा…

झलक झलक कर दिल से खोने ,विद्रोही हैं स्वप्न सलोने ,
लगते हैं आंखों को धोने , उन सपनों में आना ...
मधुर मधुर अनुपम यादों में यूं, आंखों का भर आना ,
इन आंखों में सपने डूबे ,तुम भी दिलबर आना.....

" kya khen shabd ho to kuch likhen, ek pyara sa ehsaah, ek cahet kuch adhure armano ke anchal pr jaise bikhree see jatee hai....."

"tanhaee mey dil ghabrey, sanson mey uljen ho jaye, betabee ka chor nahee hoo, tub tum dibar aanaa......."

Regards

अल्पना वर्मा ने कहा…

bahut khubsurat

swati ने कहा…

sundar prayaas..

Abhishek ने कहा…

स्वप्न सुरा के मदिरालय में ,मचल मचल गिर जाना ,
याद रहेगा तेरा मुझको , वादों से फ़िर जाना ...
Acchi lagi kavita aapki.

shama ने कहा…

"Milna julna bhool gaye, kya milana, kya milaana..."
"Madhur, anupam yadonmen...."
"Bichhada thaa jab apnaa thaa, milaa thaa, thaa begana.."
Kin, kin panktiyonka sandarbh dun...!Harek pankti chahtee hun, mukhodgat ho jaye...!
Aur harek kavitaakee !

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" ने कहा…

सिसक-सिसक कर सोते हैं वो,गुपचुप गुपचुप रोते हैं वो ,
अजब-अजब से होते हैं वो, समझो दिल का आना
saty hai par aapako abhee tak yaad hai ya nai koi baat hai
"badhaiyaan "

अनुपम अग्रवाल ने कहा…

प्रिय मित्र बिल्लोरे जी
इशारों को अगर समझो
राज़ को राज़ रहने दो

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

बहुत बढिया ।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

बहुत बढिया ।

hindustani ने कहा…

बहूत सुंदर लिखा है आपने
बधाई स्वीकार करे
मेरे ब्लॉग पर भी पधारे

मयंक ने कहा…

मधुर मधुर अनुपम यादों में यूं, आंखों का भर आना ,
इन आंखों में सपने डूबे ,तुम भी दिलबर आना.....

ज़िन्दगी का अहसान है हम पर
बीता याद दिलाना

अनुपम जी धन्यवाद इस तरह की खूबसूरत रचनाएँ देने के के लिए
बेहतरीन

VisH ने कहा…

anupam ji ...achha laga aapka mere blog par aana .....mere utsahvardhan ke liye sukriya....aasha karta hui...aapko padne ka or kuch naya sheekhne ka avsar milta rahega....


Jai ho Mangalmay ho..

रंजना ने कहा…

bahut hi sundar aur bhaavpoorn rachna......

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

मधुर मधुर अनुपम यादों में यूं, आंखों का भर आना ,
इन आंखों में सपने डूबे ,तुम भी दिलबर आना....


क्या बात है अग्रवाल साहब ??? मजा आगया ! शुभकामनाएं !

बवाल ने कहा…

Aapka kaavy sundar hai anupam saheb. Man ko meetha lagta hai. Sach.

गौतम राजरिशी ने कहा…

क्या बात है सर...वाह.इन रचनाओं से वंचित ही था मैं अब तलक.वाह...वाह
बेमिसाल शब्द-संयोजन

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बधाई मान्यवर
शुभकामनाएं..............

राज भाटिय़ा ने कहा…

बिछड़ा था जब अपना था , मिला था --था बेगाना,
बात- बात में करा था उसने , मुझको भी दीवाना
अनुपम जी आप ने तो भाई सब के दिल कि बात लिख दी, बहुत सुंदर, अपनी सी लगी यह आप की कविता धन्यवाद

Suresh Chandra Gupta ने कहा…

बहुत सुंदर.

Dr. Chandra Kumar Jain ने कहा…

आप तो सचमुच जिंदगी
और जीवन्तता लिख रहे हैं.
======================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

bahadur patel ने कहा…

bahut achchha laga aap mere abhi-abhi post kiye blog par aaye.mujhe apane blog par aane ka avasar diya.natizatan maine bahut khubsurat panktiyan padhi.badhai.

BrijmohanShrivastava ने कहा…

तेरा ही तो नशा चडा है ,नशे से क्या घबराना /और हर नस में इस अलग नशा है /स्वप्न सुरा का मदिरालय /इसके बाद आँखे भर आना स्वाभाविक ही है /""आए थे हँसते खेलते मैखाने की तरफ़ ,जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए "

mehek ने कहा…

भूली --बिसरी यादें उसकी ,सीखा था बिसराना,
याद आ गयी,शुरू किया जब फ़िर ख्वाबों में आना ...
सिसक-सिसक कर सोते हैं वो,गुपचुप गुपचुप रोते हैं वो ,
अजब-अजब से होते हैं वो, समझो दिल का आना ...
bahut gehre jazbaat,atisundar.
hamare blog par aakar comment karne ke liye shukriya,aur sawal ka jawab hai haanji mehhekk.bogspot bhi hamara hi hai,bahut shukran

sanjay jain ने कहा…

हर नस में इक अलग नशा है ,वो आए मैखाना ,
आए हैं , और रचे बसे हैं , किसे यहाँ से जाना ...
शमा जली थी हौले - हौले ,जलता है परवाना ,
वाह ! अनुपम जी क्या बात कही है शमा जली थी हौले - हौले ,जलता है परवाना / वास्तव में शमा हौले - हौले जलकर दूसरो को रोशन करती है और परवाना ख़ुद जलकर अपना जीवन नष्ट करता है इसी प्रकार सुरा केवल दूसरो का जीवन नष्ट ही कर सकती है / मेरे ब्लॉग पर आने का कष्ट करें /

alok times ने कहा…

Aapki is dil lagi me hum apna dil kho baithe
kal tak us khuda k the aaj apke ho baithe.
pyar suna to tha diwana kr deta hai
aaj khud krke hum b hosh kho baithe

RAJ SINH ने कहा…

anupamji,
gazal to aapkee gazal hotee hee hai,tippaniyon me sabne kaha hee hai. billore jee se chotee see guftgu ullasit kar gayee.

yaad hai ya nayee baat hai ?

raz ko raz rahne do !

theek hai yaadon me nai baat ka chaunk bhee ho sakta hai.

baharhal ' baat ' kuch bhee ho 'niklegee to shayad kabhee door talak jayegee 'apne raz savache rakhiye ham to haledil aapka aapke andaz me sune itna hee haasil chahte hain.aapkee shan me ek tukka ........

koyee pooche to ham batayenge
koyee dilbar bhee dhoondh layenge !