मै खड़ा ही रहा.., पूछता पूछता...
उसने नज़रें झुकाई,जवाब हो गया ||
फलसफा ही पढ़ा था, सफा दर सफा,
उसने जो लिख दिया ,वो किताब हो गया ||
मैंने उम्र गुज़ारी ,उनके इंतजार में
वो मुस्कुरा जो दिए तो हिसाब हो गया ||
मै तरसता.. रहा... अपनी पहचान को ,
उसने नाम लिया , तो खिताब हो गया ||
दिल से मैंने, ये चाहा,भुलाऊँ उसे....
मेरा दिल ही.., मेरे ख़िलाफ़ हो गया ||
मै खड़ा ही रहा ......
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सोमवार, 18 मई 2009
रविवार, 14 दिसंबर 2008
कैसे सिखाऊँ तुमको ..
हमने वफ़ा भी सीखी , तुमने सुकूँ ना पाना ,
कैसा अजीब लगता है,तुमको दिल लगाना |
इस शहर की बाँहों में , निकलोगे राहों में ,
बैठा है इक सवाली , तेरे नाम का दीवाना |
कैसे यकीन करोगे ,इस दिल की चाहतों पे ,
तेरे नाम से है रोशन , वरना है वीराना |
जब से कहीं मिले हो , रुख पे बढ़ी है लाली ,
आँखें झुकी हुई हैं , नूर हुआ नज़राना |
तेरे कदम से रोशन , होगा गरीबखाना ,
आदत सी हो गयी है,जी भर के तडपाना |
दर-दर की ठोकरें जो ,तेरे नाम पे हैं खायीं,
ज़ाहिर तो तब करेंगे , आओ गरीबखाना |
चाहो तो मत संवारो ,मेरा नसीब दिलबर ,
तुझको ही मै तो जानूँ , बाकी हूँ अन्जाना |
ना चाहो तो ना आओ , हमदम गरीबखाना ,
कैसे सिखाऊँ तुमको , वादों का अब निभाना |
हमने वफ़ा भी सीखी .........
कैसा अजीब लगता है,तुमको दिल लगाना |
इस शहर की बाँहों में , निकलोगे राहों में ,
बैठा है इक सवाली , तेरे नाम का दीवाना |
कैसे यकीन करोगे ,इस दिल की चाहतों पे ,
तेरे नाम से है रोशन , वरना है वीराना |
जब से कहीं मिले हो , रुख पे बढ़ी है लाली ,
आँखें झुकी हुई हैं , नूर हुआ नज़राना |
तेरे कदम से रोशन , होगा गरीबखाना ,
आदत सी हो गयी है,जी भर के तडपाना |
दर-दर की ठोकरें जो ,तेरे नाम पे हैं खायीं,
ज़ाहिर तो तब करेंगे , आओ गरीबखाना |
चाहो तो मत संवारो ,मेरा नसीब दिलबर ,
तुझको ही मै तो जानूँ , बाकी हूँ अन्जाना |
ना चाहो तो ना आओ , हमदम गरीबखाना ,
कैसे सिखाऊँ तुमको , वादों का अब निभाना |
हमने वफ़ा भी सीखी .........
मंगलवार, 18 नवंबर 2008
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया
आईने के सामने बैठाया उन्हें ,
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ।
लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।
गैरों की इनायत किससे कहें ,
जो अपना था ,वो, अन्जाना हो गया ।
सारी रात, कटी मेरी, आंखों में ,
यूं कयामत उनका सपना आना हो गया ।
यूँ तो शरमो हया के परदे थे ,
पलकॊं से , उनका,झपकाना खो गया ।
अरमाँ मचले,और फ़िर दिल में रहे ,
बेईमान था मौसम , सुहाना हो गया ।
हम किस की शिकायत किससे करें ,
दिल अपना था वो बेगाना हो गया ॥
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ,
मेरा आईना उनका दीवाना ...........
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ।
लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।
गैरों की इनायत किससे कहें ,
जो अपना था ,वो, अन्जाना हो गया ।
सारी रात, कटी मेरी, आंखों में ,
यूं कयामत उनका सपना आना हो गया ।
यूँ तो शरमो हया के परदे थे ,
पलकॊं से , उनका,झपकाना खो गया ।
अरमाँ मचले,और फ़िर दिल में रहे ,
बेईमान था मौसम , सुहाना हो गया ।
हम किस की शिकायत किससे करें ,
दिल अपना था वो बेगाना हो गया ॥
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ,
मेरा आईना उनका दीवाना ...........
सोमवार, 3 नवंबर 2008
तुम भी दिलबर आना
मिलना जुलना भूल गए हैं ,क्या मिलना क्या मिलाना ,
दिल दिमाग में बसे हुए हैं , क्या आना क्या जाना ...
बिछड़ा था जब अपना था , मिला था --था बेगाना,
बात- बात में करा था उसने , मुझको भी दीवाना ...
भूली --बिसरी यादें उसकी ,सीखा था बिसराना,
याद आ गयी,शुरू किया जब फ़िर ख्वाबों में आना ...
सिसक-सिसक कर सोते हैं वो,गुपचुप गुपचुप रोते हैं वो ,
अजब-अजब से होते हैं वो, समझो दिल का आना ...
हर नस में इक अलग नशा है ,वो आए मैखाना ,
आए हैं , और रचे बसे हैं , किसे यहाँ से जाना ...
शमा जली थी हौले - हौले ,जलता है परवाना ,
शमा जली थी , हौले - हौले जलता है परवाना ,
तेरा ही तो नशा चढ़ा है , नशे से क्या घबराना ...
बलिदानों की मंद पिपासा , लै कर में शिर आना ,
कम्पित अधरों की अभिलाषा में चहुँदिश घिर जाना ,
स्वप्न सुरा के मदिरालय में ,मचल मचल गिर जाना ,
याद रहेगा तेरा मुझको , वादों से फ़िर जाना ...
झलक झलक कर दिल से खोने ,विद्रोही हैं स्वप्न सलोने ,
लगते हैं आंखों को धोने , उन सपनों में आना ...
मधुर मधुर अनुपम यादों में यूं, आंखों का भर आना ,
इन आंखों में सपने डूबे ,तुम भी दिलबर आना.....
दिल दिमाग में बसे हुए हैं , क्या आना क्या जाना ...
बिछड़ा था जब अपना था , मिला था --था बेगाना,
बात- बात में करा था उसने , मुझको भी दीवाना ...
भूली --बिसरी यादें उसकी ,सीखा था बिसराना,
याद आ गयी,शुरू किया जब फ़िर ख्वाबों में आना ...
सिसक-सिसक कर सोते हैं वो,गुपचुप गुपचुप रोते हैं वो ,
अजब-अजब से होते हैं वो, समझो दिल का आना ...
हर नस में इक अलग नशा है ,वो आए मैखाना ,
आए हैं , और रचे बसे हैं , किसे यहाँ से जाना ...
शमा जली थी हौले - हौले ,जलता है परवाना ,
शमा जली थी , हौले - हौले जलता है परवाना ,
तेरा ही तो नशा चढ़ा है , नशे से क्या घबराना ...
बलिदानों की मंद पिपासा , लै कर में शिर आना ,
कम्पित अधरों की अभिलाषा में चहुँदिश घिर जाना ,
स्वप्न सुरा के मदिरालय में ,मचल मचल गिर जाना ,
याद रहेगा तेरा मुझको , वादों से फ़िर जाना ...
झलक झलक कर दिल से खोने ,विद्रोही हैं स्वप्न सलोने ,
लगते हैं आंखों को धोने , उन सपनों में आना ...
मधुर मधुर अनुपम यादों में यूं, आंखों का भर आना ,
इन आंखों में सपने डूबे ,तुम भी दिलबर आना.....
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