मंगलवार, 18 नवंबर 2008

मेरा आईना उनका दीवाना हो गया

आईने के सामने बैठाया उन्हें ,
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ।
लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।
गैरों की इनायत किससे कहें ,
जो अपना था ,वो, अन्जाना हो गया ।
सारी रात, कटी मेरी, आंखों में ,
यूं कयामत उनका सपना आना हो गया ।
यूँ तो शरमो हया के परदे थे ,
पलकॊं से , उनका,झपकाना खो गया ।
अरमाँ मचले,और फ़िर दिल में रहे ,
बेईमान था मौसम , सुहाना हो गया ।
हम किस की शिकायत किससे करें ,
दिल अपना था वो बेगाना हो गया ॥
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ,
मेरा आईना उनका दीवाना ...........

44 टिप्‍पणियां:

डॉ .अनुराग ने कहा…

लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।

bahut khoob.....

mehek ने कहा…

lamhalamhawala sher behtarin puri nazm hi khubsurat hai

विवेक सिंह ने कहा…

nice gazal .

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

हम किस की शिकायत किससे करें ,
दिल अपना था वो बेगाना हो गया ॥
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ,
मेरा आइना उनका दीवाना .....

बहुत खूब अनुपम जी ! शुभकामनाएं !

बवाल ने कहा…

इस तरह की ग़ज़्ल को देखे हुए !
हमको भी अब तो ज़माना हो गया !!

क्या बात है अनुपम साहब ! किस अदा से इंतज़ार का ख़ात्मा किया सर. बहुत मज़ा आ गया सच. अहा !
आप कहते हो सीख रहा हूँ, छुपे रुस्तमों को भी कहीं सीखना पड़ता है ? कहिये ! हा हा !
आपका जज़्बा क़द्र के क़ाबिल है !

"अर्श" ने कहा…

आईने के सामने बैठाया उन्हें ,
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ।
लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।

bahot khub likha hai aapne bahot badhai aapko dhero sadhuwad.... aap jaise shayair ka mere blog pe bahot swagat hai ummid hai mulakat hogi..

regards
arsh

नीरज गोस्वामी ने कहा…

मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ।
आईना उनका दीवाना हुआ हो ना हुआ हो लेकिन हम आपके दीवाने हो गए...भाई बहुत खूब लिखा है...
नीरज

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

बहुत खूब !
- लावण्या

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही उम्दा, मेरा आईना उन का दिवाना हो गया...वाह वाह
धन्यवाद

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा है

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकारें

अनूप शुक्ल ने कहा…

आपके दीवाने बढ़ते जा रहे हैं। बधाई!

गौतम राजरिशी ने कहा…

अच्छी रचना है.लेकिन ये दो पंक्तियाँ कुछ बैठ नहीं रही हैं ठीक से-
हर अँग बगावत पर आमादा ,
पलकॊं से , उनका,झपकाना खो गया

...

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत खूब !

नारदमुनि ने कहा…

agarwal jee aaina unka diwana ho gya. shayad khariyat idhar nahin hai. narayana narayan

seema gupta ने कहा…

आईने के सामने बैठाया उन्हें ,
मेरा आईना उनका दीवाना हो गया ।
" ayena dekh kr hume bhool jatyn hain vo, apne husn pr is kadar itratyn hain vo...."

Wonderful..

Regards

श्यामल सुमन ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति। मेरी तरफ से भी दो तात्कालिक पंक्तियाँ-

आईना जब भी देखूँ मैं चौंक जाता हूँ।
खुद से ही भागने का इक बहाना हो गया।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

भाई अनुपम जी,
सुंदर गजल प्रस्तुति पर हार्दिक आभार. आपके रौ में बह कर मैं भी कह रहा हूँ कि ........

मज़ा आ गया भाई क्या खूब लिखा है!
रखा सामने आइना तो और भी सुंदर दिखा है.
दीवाने अफसाने भी तो अनजाने ही दिखा है
बेगाने दीवानों का सुहावना झपकाना भी दिखा है.

चन्द्र मोहन गुप्त

sanjay jain ने कहा…

आईने का दीवाना हो जाना अपने का बेगाना हो जाना समेटे हुए एक एक क्षण का अफसाना बन जाना बेईमान मौसम का सुहाना हो जाना /सही बात है जब दिल ही बेगाना हो गया तो भला किससे शिकायत की जा सकती है ""मुद्दतों पहलू में पाला हमने हम कुछ भी नहीं /तुमने डाली इक नज़र और दिल तुम्हारा हो गया /शिकायत की गुंजाइश ही कहाँ रहती है /अग्रवाल जी उनका सपना आना या उनका सपने में आना को आपके द्वारा क़यामत आना कहा जाना -कयामंत दो तरह से आती है एक तो जो आपने कहा सपने की और एक मैं कहता हूँ ""क़यामत क्यों नहीं आती खुदा ये माजरा क्या है /हमारे सामने पहलू में वो दुश्मन के बैठे हैं /

sanjay jain ने कहा…

अग्रवाल साहिब इसे मेरी और बृजमोहन श्रीवास्तव की सम्मिलित टिप्पणी मान कर कृपया मेरे ब्लॉग पर पधारे जिसमें मैंने णमोकार मन्त्र और जीवन है दो पल का गीत लिखा हैं

BrijmohanShrivastava ने कहा…

सरजी आपके आईने की दीवानगी पढ़ली समझली अनुभव करली और आज दोपहर में जैन साहेब के साथ मिलकर संयुक्त टिप्पणी भी दी है -मैं भी सोच रहा हूँ आइना दिखा ही दूँ

shyam kori 'uday' ने कहा…

हम किस की शिकायत किससे करें ,
दिल अपना था वो बेगाना हो गया ॥
... बहुत रोचक व रोमांटिक अभिव्यक्ति है।

swati ने कहा…

बहुत ही सुंदर बहुरंगी कविता आभार

Manish Kumar ने कहा…

roomaniyat ke rang mein rangi lagi ye ghazal !

shama ने कहा…

Waise to sabhi pankiyan sundar hain, par jo Anuragji ne avatarit kee hain, mujhebhee wahee bohot pasan ayee hain...aapka lekhan din b din nikharta jaa raha hai ye mehsoos ho raha hai..
Shama

Akshaya-mann ने कहा…

लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।

क्या कहे गए आप बहुत ही ऊँची बात बोल दी जो बिखरा था वो............
आईना उनका दीवाना हुआ ये दुनिया आपकी दीवानी होने वाली है..............



๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑
सब कुछ हो गया और कुछ भी नही !!

मेरी शुभकामनाये आपकी भावनाओं को आपको और आपके परिवार को
आभार...अक्षय-मन

ilesh ने कहा…

khubsurat ......लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।

behad pasand aaya....

sanjay jain ने कहा…

श्रीयुत अग्रवाल जी /आपने मेरे ब्लॉग पर पधारने की कृपा की मैं आभारी हूँ /श्री बृजमोहन श्रीवास्तव के ई मेल पर आपने उनको लिखा था कि संजय का ब्लॉग पूर्ण रूप से नहीं खुल रहा है ,आज मैंने सुधार कर ""संयम ""एवं
"" दुस्साहस ""के साथ जीवन है दो पल का पुन पोस्ट किया है ब्लॉग पर पधारने का कष्ट करें

Poonam Agrawal ने कहा…

Mera aina unka deevana ho gaya....behad sunder bhav hai badhai...

bahadur patel ने कहा…

bahut badhiya hai.anand aa gaya.

Pt. D.K.Sharma "Vatsa" ने कहा…

गैरों की इनायत किससे कहें ,
जो अपना था ,वो, अन्जाना हो गया ।
बहुत खूब....
बेहतरीन प्रस्तुति के लिये बधाई .

hindustani ने कहा…

बहूत ही उम्दा रचना लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।

BrijmohanShrivastava ने कहा…

अग्रवाल साहेब /ये क्या कर रिये हैंगे आप /उनको आईने के सामने बिठाल दिया वो क्या बैठे ही रहेंगे /कुछ नया लिख कर लाभान्वित कराइए

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

कहां हो दादा...?

alok times ने कहा…

sahi hain

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

सुंदर ।

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

kya baat hai sir ji,

bahut sundar .. man prasaan ho gaya ..


aapki saari rachnaayen pad li .
nahut accha likhte hai ...

bahut badhai ho

vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

विवेक सिंह ने कहा…

आईना दीवाना हो गया तो लिखना क्यों बंद कर दिया सर ?

विक्रांत बेशर्मा ने कहा…

लम्हा लम्हा समेटा था मैने कभी ,
जो बिख्ररा था, वो, अफ़साना हो गया।
गैरों की इनायत किससे कहें ,
जो अपना था ,वो, अन्जाना हो गया ।

बहुत ही उम्दा !!!!!!!

vandana ने कहा…

mera aaina unka deewana ho gaya...........kya khoob panktiyan likhi hain

मयंक ने कहा…

ज़िंदगी में आए थे अभी एक रोज़ पहले ही
मुसलसल सपनों में उनका आना जाना हो गया

अनुपम जी क्या लिखते हैं आप
ब्लाग जगत आपका दीवाना हो गया

Dev ने कहा…

First of all Happy New Year Sir

हम किस की शिकायत किससे करें ,
दिल अपना था वो बेगाना हो गया ॥

Bahut achhi kavita man ko chho gayi
Regards..

shama ने कहा…

Anupamji, aapka naam tippanee deneme mujhe hamesha sahayta karta hai..."aapne mere blogpe dee tippanee ho ya aapki rachna, wo "Anupam" hee hoti hai ! Aur jahan itne diggajon ne itna kuchh keh diya mai ek adnaasi wyakti kya kahun ?
"Page load errorr" ke chalte, bohot der koshish karke aapke blogpe pohonch paayi hun aur bohot dinon baad(iske liye kshama prarthi hun...ummeed hai maaf karenge).
Chahti to thee ke harek rachnake neeche kuchh tippanee karun, par shabd nahee soojh rahe !
Aapki tippanee ke hamesha shukrguzaar rehti hun...kaash aaapheeki tarah mai bhee tippanee de patee...usee tareeqese...!Itni pratibha mujhme nahee hai !

Babli ने कहा…

आपकी ख़ूबसूरत टिपण्णी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!
मुझे आपकी ये रचना बेहद पसंद आया! आपके नए पोस्ट के इंतज़ार में हैं!